Got Questiones

 
 
 
कलिसिया का मेघारोहण (बादलो पर उठाया जाना) क्या है?
एक हजार वर्ष का राज्य क्या है, और क्या इसे शब्दिक रूप मे समझना चाहिए?
अंत के समयो की भविष्यवाणीयो के अनुसार क्या होने वाला है?
विपत्तिकाल के सम्बन्ध मे मेघारोहण कब घटित होगा?
क्या आत्मा के आश्चर्यजनक वरदान आज के लिए है?
मैं पवित्र आत्मा से कैसे परिपूर्ण हो सकता हूँ?
आत्मा की अगुवाई से बोलने का क्या अर्थ है? क्या आत्मा की अगुवाई में बोलने का वरदान आज भी है?
पवित्र आत्मा कौन है?
मैं परमेश्वर के साथ ठीक प्रकार से कैसे रह सकता हूँ?
मैंने अभी ही अपना विश्वास यीशु में रखा है … अब क्या?
चर्च (कलिसिया) क्या है?
चर्च (कलिसिया) का क्या उदेश्य है?
क्या स्त्रियों को उपदेशों (पादरियों)/प्रचारकों के रूप में सेवा करनी चाहिये?
क्रिश्चियन नामकरण संस्कार का क्या महत्व है?
क्या आत्मा के आश्चर्यजनक वरदान आज के लिए है?
प्रश्न: क्या आत्मा के आश्चर्यजनक वरदान आज के लिए है?

उत्तर:
पहले, यह मानना महत्वपूर्ण है कि यह प्रश्न परमेश्वर आज आश्चर्यकर्म करते है या नहीं का नहीं है। यह दावा करना मुर्खतापूर्ण और बाईबल के अनुसार नहीं होगा कि आज परमेश्वर लोगों को चंगा नहीं करते, लोगों से बात नहीं करते, और अद्भुत चिन्ह और आश्चर्यकर्म नहीं करते है। प्रश्न यह है कि क्या कुरिन्थियो 12-14 में वर्णित आश्चर्यजनक वरदान आत्मा के आश्चर्यजनक वरदान क्या आज भी कलीसिया में सक्रिय है। यह प्रश्न इसका भी नहीं है कि क्या पवित्र आत्मा किसी को आश्चर्यजनक वरदान देता है? प्रश्न यह है कि क्या पवित्र आत्मा आज भी आश्चर्यजनक वरदानों को बाँटता है। सबसे पहले हम यह पूर्णतया मानते है कि पवित्र आत्मा किसी को भी अपनी इच्छा के अनुसार वरदान देने के लिए स्वंतत्र है (कुरिन्थियों 12:7-11) ।
प्रेरितो के काम की पुस्तक और पत्रीयों में, आश्चर्य कर्मो की बड़ी संख्या को प्रेरितो और उनके नजदीकी सहयोगियों द्वारा ही दिखाया गया है । हमें पौलुस इस “क्यों” का कारण देता है ‘‘प्रेरित के लक्षण भी तुम्हारे बीच सब प्रकार के धीरज सहित चिन्हों, और अद्भुत कार्यों, और सामथ्र्य के कामों से दिखाए गए’’ (2 कुरिन्थियों 12:12)। यदि मसीह में हर एक विश्वासी चिन्ह, अद्भुत कार्यो और सामथ्र्य के कार्यो को दिखाने की योग्यता प्रदान कर दी जाए,तो चिन्ह, अद्भुत कार्य और सामथ्र्य के कार्य फिर किसी भी तरह प्रेरित की पहचान लक्षण नहीं हो सकते है। प्रेरितों के काम 2:22 हमें बताता है कि यीशु को ‘‘सामथ्र्य के कार्यो, अदभुत कार्यों और चिन्हों’’ द्वारा प्रमाणित किया गया । इसी रीति से, प्रेरित भी जो अद्भुत कार्य दिखाते थे, उसके द्वारा पहचाने जाते थे कि यथार्थ में परमेश्वर की ओर से सन्देशवाहक है। प्रेरितो के काम 14:3 ब्यान करता है कि पौलुस और बरनाबास जो आश्चर्यकर्म दिखाता था उसके द्वारा सुसमाचार के वचन को सुदृढ़ किया गया ।

कुरिन्थियों के अध्याय 12-14 मुलत: आत्मा के वरदानों के विषय के बारे में है। इन वचनों से लगता है कि ‘‘साधारण’’ मसीहीयों को कभी-कभी आश्चर्यजनक कार्य करने हेतु वरदान दिए गए (12:8-10, 28-30)। हमें नहीं बताया गया यह कितनी सामान्योक्ति रूप से घटती थी। हमने जो अब तक सिखा है कि, प्रेरितों को चिन्हों और अद्भुत कार्यों द्वारा पहचाना जाता था, और जो आश्चर्यजनक वरदान साधारण मसीहीयों को दिए गए वह विसर्जन थे न कि नियम । प्रेरितो और उनके नजदीकी सहयोगियों के अलावा, नया नियम कही पर भी विशेष रूप से साधारण जनों को आश्चर्यजनक वरदानों का उपयोग करते हुए वर्णन नहीं करता है।

इस बात का अहसास होना महत्वपूर्ण है कि पहली कलीसिया के पास पुरी तरह से पूर्ण बाईबल नहीं थी, जैसी आज हमारे पास है (2 तीमुथियुस 3:16-17) । इसलिए पहले मसीही के लिए भविष्यवाणी, ज्ञान, बुद्धि के वरदान आदि आवश्यक थे जिससे वह जान सके कि परमेश्वर क्या चाहते है कि वह करे। भविष्यवाणी के वरदान ने विश्वासी को परमेश्वर से नया सच और प्रगटिकरण को व्यक्त करने की योग्यता दी। अब जबकि बाईबल में परमेश्वर का प्रगटिकरण सम्पूर्ण है, ‘‘प्रगटिकरण करने वाले’’ वरदानों की आवश्यकता अब नहीं रही है, कम से कम उतने परिमाण में नहीं जितने वह नये नियम में थे ।

परमेश्वर आश्चर्यजनक रूप से हर दिन लोगों को चंगा करते है। परमेश्वर आज भी हम से बात करते है, चाहे सुनने योग्य आवाज में, हमारे दिमागों में, या प्रभावों और भावनाओं द्वारा । परमेश्वर अब भी आश्चर्यचकित कर देने वाले आश्चर्यकर्म, चिन्ह और अद्भुत कार्य करते है और कभी-कभी इन आश्चर्यकर्मो को किसी एक मसीही जन द्वारा दिखाते है। हालांकि जरूरी नहीं है कि यह बाते आत्मा के आश्चर्यजनक वरदान ही हो । आश्चर्यजनक वरदानों का मूल उद्देश्य सुसमाचार सच है और प्रेरित सच्चाई में परमेश्वर के सन्देशवाहक है प्रमाणित करना था । बाईबल स्पष्टता से नहीं कहती कि आश्चर्यजनक वरदान समाप्त हो गए है, परन्तु यह इसकी नींव अवश्य रखती है कि क्यों वह अब उस परिमाण में नहीं घटेंगे जितने वह होते थे जैसा कि नये नियम में लिखा मिलता है।

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