Got Questiones

 
 
 
कलिसिया का मेघारोहण (बादलो पर उठाया जाना) क्या है?
एक हजार वर्ष का राज्य क्या है, और क्या इसे शब्दिक रूप मे समझना चाहिए?
अंत के समयो की भविष्यवाणीयो के अनुसार क्या होने वाला है?
विपत्तिकाल के सम्बन्ध मे मेघारोहण कब घटित होगा?
क्या आत्मा के आश्चर्यजनक वरदान आज के लिए है?
मैं पवित्र आत्मा से कैसे परिपूर्ण हो सकता हूँ?
आत्मा की अगुवाई से बोलने का क्या अर्थ है? क्या आत्मा की अगुवाई में बोलने का वरदान आज भी है?
पवित्र आत्मा कौन है?
मैं परमेश्वर के साथ ठीक प्रकार से कैसे रह सकता हूँ?
मैंने अभी ही अपना विश्वास यीशु में रखा है … अब क्या?
चर्च (कलिसिया) क्या है?
चर्च (कलिसिया) का क्या उदेश्य है?
क्या स्त्रियों को उपदेशों (पादरियों)/प्रचारकों के रूप में सेवा करनी चाहिये?
क्रिश्चियन नामकरण संस्कार का क्या महत्व है?
हम पवित्र आत्मा को कब/कैसे प्राप्त करते हैं?
श्न: हम पवित्र आत्मा को कब/कैसे प्राप्त करते हैं?

उत्तर:
पौलुस प्रेरित ने स्पष्टता से सिखाया कि हम पवित्र आत्मा को उसी समय पा लेते है जिस समय हम यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करते है। पहला कुरिन्थियों 12:13 बताता है कि, ‘‘क्योंकि हम सबने क्या यहूदी हो क्या युनानी, क्या दास हो, क्या स्वतन्त्र., एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिए बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया’’। रोमियो 8:9 हमें बताता है कि यदि किसी व्यक्ति में पवित्र आत्मा नहीं बसता है, तो वह मसीह का जन नहीं, ‘‘परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं परन्तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नही तो वह उसका जन नहीं’’। इफिसियो 1:13-14 हमें सिखाता है कि पवित्र आत्मा उन सब के लिए उद्धार की छाप है जो विश्वास करते है उद्धार की छाप है ‘‘और उसी में तुम भी, जब तमु ने सत्य का वचन सुना जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार है और जिस पर तुम ने विश्वास किया, प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी । वह उसके मोल लिए हुओ के छुटकारे के लिए हमारी मीरास का बयाना है, कि उसकी महिमा की स्तुति है।

यह अंश हमें स्पष्ट करते है कि पवित्र आत्मा उद्धार पाने के समय मिलता है । पौलुस यह नहीं कह सकता था कि हमें सबको एक ही आत्मा का बपतिस्मा मिला और हम सबको एक ही आत्मा पिलाया गया यदि सब कुरिन्थियों के विश्वासीयों को पवित्र आत्मा ना मिला होता । रोमियो 8:9 और भी दृढता से बयान करता है, कि जिस में आत्मा नहीं बसता, वह मसीह का जन नही है। इसलिए, आत्मा का होना उद्धार के होने की पहचान का तत्व है। आगे, पवित्र आत्मा ‘‘उद्धार की छाप’’ नहीं हो सकता है (इफिसियों 1: 13-14) यदि वह उद्धार पाने के समय नहीं मिलता है। बहुत से धर्म शास्त्र के वचन यह बहुतायत से स्पष्ट करते है कि जब हम मसीह को उद्धारकर्ता ग्रहण करते है उसी समय हमारा उद्धार सुरक्षित हो जाता है।

यह चर्चा विवादस्पद है क्योकि पवित्र आत्मा की सेवकाईयों को अक्सर उलझा दिया जाता है। आत्मा का मिलना/ भीतर रहना उद्धार मिलने के समय होता है। आत्मा से परिपूर्ण होना मसीह जीवन में चलती रहने वाली प्रक्रिया है। हम मानते है कि आत्मा का बपतिस्मा उद्धार प्राप्त करने के समय होता है, कुछ मसीही लोग ऐसा नहीं मानते है । इसके परिणामस्वरूप कभी कभी आत्मा के बपतिस्मा को आत्मा का उद्धार के बाद मिलना जैसी असंगत अथवा उलझाने वाली शिक्षा को उत्पन करती है ।

निष्कर्ष में, हम पवित्र आत्मा कैसे प्राप्त करते हैं? हम पवित्र आत्मा को बस प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण करके प्राप्त करते है (यूहन्ना 3:5-16) हम पवित्र आत्मा को कब प्राप्त करते हैं? जिस पल हम विश्वास करते है उसी समय पवित्र आत्मा का हम में स्थाई रूप से वास हो जाता है।

विपत्तिकाल क्या है? हम कैसे जानते है कि विपत्तिकाल सात वर्षो का होगा?
श्यीशु मसीह का पुनरागमन क्या है?
कलिसिया का मेघारोहण (बादलो पर उठाया जाना) क्या है?
अन्त समयो के क्या चिन्ह है?
पवित्र आत्मा के विरूद्ध निन्दा क्या है?
हम पवित्र आत्मा को कब/कैसे प्राप्त करते हैं?
मैं कैसे जान सकता हूँ कि मेरा आत्मिक वरदान क्या है?
जीवन का अर्थ क्या है?
अंत के समयो की भविष्यवाणीयो के अनुसार क्या होने वाला है?
क्या बाइबल सच में परमेश्वर का वचन है?
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चर्च (कलिसिया) में उपस्थिति होना क्यों महत्वपूर्ण है?
मैं संगठित धर्म में क्यो विश्वास करू?
सब्त किस दिन होता है, शनिवार या रविवार? क्या मसीही लोगों को सब्त का दिन मानना चाहिए?