Got Questiones

 
 
 
कलिसिया का मेघारोहण (बादलो पर उठाया जाना) क्या है?
एक हजार वर्ष का राज्य क्या है, और क्या इसे शब्दिक रूप मे समझना चाहिए?
अंत के समयो की भविष्यवाणीयो के अनुसार क्या होने वाला है?
विपत्तिकाल के सम्बन्ध मे मेघारोहण कब घटित होगा?
क्या आत्मा के आश्चर्यजनक वरदान आज के लिए है?
मैं पवित्र आत्मा से कैसे परिपूर्ण हो सकता हूँ?
आत्मा की अगुवाई से बोलने का क्या अर्थ है? क्या आत्मा की अगुवाई में बोलने का वरदान आज भी है?
पवित्र आत्मा कौन है?
मैं परमेश्वर के साथ ठीक प्रकार से कैसे रह सकता हूँ?
मैंने अभी ही अपना विश्वास यीशु में रखा है … अब क्या?
चर्च (कलिसिया) क्या है?
चर्च (कलिसिया) का क्या उदेश्य है?
क्या स्त्रियों को उपदेशों (पादरियों)/प्रचारकों के रूप में सेवा करनी चाहिये?
क्रिश्चियन नामकरण संस्कार का क्या महत्व है?
क्या स्त्रियों को उपदेशों (पादरियों)/प्रचारकों के रूप में सेवा करनी चाहिये?

प्रश्न: क्या स्त्रियों को उपदेशों (पादरियों)/प्रचारकों के रूप में सेवा करनी चाहिये?

उत्तर: आज के समय में इससेज्य़ादा वाद-विवाद का कोई और विषयनहीं हैं जितनाकि स्त्रियों के उपदेशों/प्रचारकों के रूप में सेवा करने का विषय हैं परिणामस्वरूप यह बहुत महत्वपूर्णहैं कि हम इस विषय को पुरुष बनाम स्त्री के रूप में ना देखें ऐसी स्त्रियांहंं जो यह मानती हैं कि स्त्रियोंको उपदेशकों (पादरियों)के रूप में सेवा नहीं करनीचाहिये तथा बाइबल स्त्रियोंके सेवकाई करनेपर प्रतिबंध लगातीहै-तथा ऐसे पुरूष हैं जो मानतेहैं कि स्त्रियांप्रचारकों के रूप में सेवा कर सकतीहै तथा सेवकाईके लिये स्त्रियोंपर कोई प्रतिबंधनहीं है यह किसी श्रेष्ठताया भेदभाव का विषय नहीं है यह बाइबलव्याख्या का विषय है १तिमुथियुस :११-१२ दावाकरता है, "स्त्रीको चुपचाप, पूरीअधीनता से सीखना चाहिये। और मैं कहता हूँ कि स्त्री ना उपदेश करें,और ना पुरुषपर आज्ञा चलाये,परन्तु चुपचाप रहें " कलीसियोमें, परमेश्वर स्त्रियोंतथा पुरुषों को भिन्न-भिन्न भूमिकायें सौंपता है यह मनुष्य की रचना के तरीके का परिणाम है (१तिमुथियुस :१३) तथा पाप के संसारमें प्रवेश करनेका तरीका (२तिमुथियुस२:१४) परमेश्वर प्रेरित पौलुस के लेखन के द्वारा स्त्रियों को पुरुषों के ऊपर आत्मिक शिक्षाकी अधिकारी होनेसे प्रतिबंधित करताहै यह स्त्रियों को उपदेशकों (पादरियों)के रूप में सेवा करने से मना करता है, जिसमें कि प्रचार करनेसे लेकर शिक्षादेना तथा पुरुषोंपर आत्मिक अधिकाररखना शामिल हैं

स्त्रियों
की सेवाकाई/ स्त्रियोंके उपदेशक (पादरी)होने की इस दृष्टि पर कई "धारणाहैं एक सामान्य धारणा यह है कि पौलुस स्त्रियों को शिक्षा देनेपर प्रतिबंध इसलिएलगाता है कि पहलीसदी में, स्त्रियॉविशिष्ट रूप से अशिक्षितथी हॉलाकि१तिमुथियुस :११-१४ कही भी शैक्षिकस्तर के विषयमें नहीं कहताहै अगर सेवाकाई के लिये शिक्षाही योग्यता होती,तो यीशु के अधिकतर शिष्य इस योग्य नहींहोते एक दूसरी सामान्य धारणा यह है कि पौलुस ने केवल इफिसियोंकी स्त्रियों को शिक्षा देने से मना किया था (१तिमुथियुस,तिमुथिसुस को लिखा गया था जो कि इफिसुस की कलीसिया का उपदेशक (पादरी) था) इफिसुसका नगर अपनेअरतीमुस के मन्दिर के लिये जाना जाताथा, एक मिथ्यायूनानी/ रोमी देवी अरतीमुस की उपासना के लिये स्त्रियॉ ही अधिकारी थी हॉलाकितिमुथियुस की पुस्तक कहींभी अरतीमुस का वर्णन नहीं करती, ना ही पौलुस अरतीमुसकी उपासना को १तिमुथिसुस :११-१२ में प्रतिबंध का कारण बताता है

एक
तीसरी सामान्यधारणा यह है कि पौलुस केवल पति तथा पत्नियों को संबोधित कर रहा है, पुरुषोंतथा स्त्रियों को नहीं १तिमुथियुस२:११-१४ में यूनानी शब्दपति तथा पत्नियोंको संबोधित कर सकते हैं कैसे भी हो, उन शब्दों का मूलभूत अर्थ पुरुष तथा स्त्री है इससेआगे, वैसे ही यूनानी शब्द -१० पदों में प्रयोगकिये गए हैं क्या केवलपतियों को ही हाथोंको उठाकर बिनाक्रोध और विवाद के प्रार्थना करने को कहा गया है (पद )? क्या केवलपत्नियाँ ही शालीनता से, भले कामों से, परमेश्वर की भक्ति करेंगी(पद -१०)?निश्चित ही नहीं पद -१० स्पष्ट रूप से सामान्यपुरूषों तथा स्त्रियों को संबोधित करता है, केवलपति तथा पत्नियोंको ही नहीं। पद ११-१४ के संदर्भमें ऐसा कुछ नहीं है जो कि केवल पति तथा पत्नियों की ओर संकेत करे स्त्री उपदेशकों/प्रचारकों की व्याख्या पर एक और बार-बार किये जानेवाले विवाद का संबंध मरियम, डेबोराह, हुल्दाह, प्रिसकिल्ला तथा फीबे, वगैरहसे है-वो स्त्रियां जिन्होंने बाइबल में अगुवाई के पद संभाले हुए थे यह प्रतिवाद कुछ विशेष तथ्योंको जानने में असमर्थ है डेबराहके संबंध में यह है कि वह १३ न्यायियोंमें से एकमात्रस्त्री न्यायी थी हुल्दाहके संबंध में है कि वह बाइबल में बताये गए दर्जनों भविष्यवक्ताओं में से एक मात्र स्त्री भविष्यवक्ता थी मरियमका मार्गदर्शन से संबंध उसका मूसा तथा हारून की बहन होनाथा राजाओंके समय में दो सबसे महत्वशालीस्त्रियां एतालिय्याह तथा ईज़ेबेल-प्रेरितोंके काम की पुस्तक अध्याय १८ में प्रिसक्ल्लातथा अक्विला को मसीह के वफादारसेवकों के रूप में प्रस्तुत किया गया है प्रिसकिल्ला का नाम पहले लियागया है, संभवतःयह संकेत करतेहुए कि वो सेविकाई में अपने पति से अधिक महत्वशालीथी प्रिसकिल्लाका सेवकाई कार्यमें भाग लेनेका कहीं भी वर्णन नहीं किया गया है जो कि (१तिमुथियुस :११-१४) के विरोध में है प्रिसकिल्लातथा अक्विला, अपुल्लोसको अपने द्घरलाये थे तथा उसे अनुयायी बनायाथा, उसे परमेश्वरका वचन अधिकअच्छी प्रकार से समझाते हुए(प्रेरितों के काम १८:२६)

रोमियो १६: में जबकि फीबे को 'सेविका' की जगह 'डीकनेस'(महिला पादरी) माना गया है-यह इस बात को संकेत नहींकरता कि फीबेकलीसियो में शिक्षिका थी "शिक्षा देने में समर्थ"एक योग्यता है जो प्राचीनों (अध्यक्ष)को दी जातीहै, डीकनों को नहीं (१तिमुथियुस :; तीतुस१:-) प्राचीनों/बिशपों/डीकनो का वर्णन "एक ही पत्नी का पति," 'जिन के लड़केवाले विश्वासी हों,""आदर के योग्य।" इसके साथ-साथ,(१तिमुथियुस :-१३) तथा तितुस (:-), में पुरूषवाचक सर्वनामों का प्राचीनो/बिशपों/डीकनों के संबोधन के लिये अनन्य रूप से प्रयोग कियागया है

१तिमुथियुस :११-१४ का स्वरूप "कारण"को पूर्णतया स्पष्टबनाता है पद १३ "क्योंकि" से शुरू होताहै और उस"कारण" को बताता है जो कि पौलुसने पद ११-१२ में कहा है स्त्रियॉक्यों उपदेश ना दें तथा पुरूषों पर आज्ञा ना चलायें? क्योंकि आदम की रचनाहव्वा से पहले की गई थी तथा आदम बहकायानहीं गया था; स्त्री बहकाने में आई थी " यह कारण है परमेश्वर ने पहले आदम को बनाया तथा फिर हव्वाको बनाया, कि वो आदम की"सहायक" हो सृष्टिका यह क्रममानवजाति में परिवार में पूरे संसार पर लागू होता है (इफिसियों :२२-२३) तथा कलीसिया में भी इस वास्तविकता का कि हव्वाबहकाई गई थी, को भी एक कारणके रूप में लिया जाता है कि स्त्रियों को उपदेशकों के रूप में सेवा करना या पुरुषों के ऊपर आत्मिकनियंत्रण रखना प्रतिबंधित है यह बात कुछ लोगों को यह मानने के ओर ले जातीहै कि स्त्रियोंको शिक्षा नहींदेनी चाहिये क्योंकिउन्हें आसानी से बहकाया जा सकता है यह धारणा वाद विवाद का विषय है---- परन्तु अगर स्त्रियॉ आसानीसे बहकावे में जाती है, तो उन्हें बालकोंको शिक्षा देनेकी अनुमति क्योंदी जाती है (जो कि आसानीसे बहकाये जा सकते हैं) तथा अन्य स्त्रियों को (जो कि कल्पनानुसारअधिक आसानी से बहकाई जा सकती है)?यह वो नहींहै जो शास्त्रकहता है स्त्रियों को उपदेश देनेतथा पुरुषों के ऊपर आत्मिक नियंत्रणरखने के लियेमना किया गया है क्योंकि हव्वाबहकाई गई थी परिणामस्वरूप, परमेश्वर ने पुरुषों को कलीसिया में उपदेश देनेके मूल अधिकारदिये है

स्त्रियाँ
सत्कारशीलता, दया, शिक्षा तथा सहायता के वरदानों में श्रेष्ठ है एक कलीसिया की अधिकतर सेवकाईस्त्रियों पर निर्भर है कलीसिया की स्त्रियॉ सार्वजनिक प्रार्थनाओं या भविष्यवाणी करने(१कुरिन्थियों ११:) के लिये प्रतिबंधित नहींहै, केवल पुरुषोंके ऊपर आत्मिकउपदेश के अधिकार के लिए है बाइबल में कहीं भी स्त्रियों को पवित्र आत्माके वरदानों का अभ्यास करने के लिए नहीं रोकती (१कुरिन्थियोंअध्याय १२) स्त्रियोंको भी, पुरुषोंजितना, अन्यों की सेवा करनेके लिये तथा आत्मा के फल को (गलतियों :२२-२३) प्रदर्शित करने के लिए तथा खोए हुओंको सुसमाचार की उदघोषणा करने के लियेबुलाया गया है (मत्ती२८:१८-२०; प्रेरितों के काम :; १पतरस :१५)

परमेश्वर
ने यह आदेशदिया है कि केवल पुरुष ही कलीसिया में आत्मिक शिक्षाके पदों को संभालेंगे यह इसलियेनहीं है कि पुरुष आवश्यक रूप से बेहतरशिक्षक होते हैं, या स्त्रियॉ निकृष्ट या कम बुद्धिमान(जब कि ऐसा नहीं है) होतीहै यह केवल एक साधारणतरीका है जिसे परमेश्वरने कलीसिया के कार्य करने के लियेबनाया है पुरुषोंको अपने जीवनमें तथा अपनेशब्दों के द्वारा आत्मिकमार्गदर्शन में एक उदाहरणबनाना है स्त्रियोंको एक कम अधिकारों वाली भूमिका संभालनीहै स्त्रियोंको अन्य स्त्रियोंको शिक्षा देनेके लिये प्रोत्साहितकिया जाता है (तीतुस :-) बाइबल स्त्रियोंके बालकों को शिक्षा देने पर भी प्रतिबंध नहीं लगाती केवल एक कार्यजिसके लिये स्त्रियॉ प्रतिबंधितहैं वो है पुरुषों के ऊपर आत्मिकअधिकार रखना तर्ककी दृष्टि से इसमें वो स्त्रियॉ शामिलहै जो कि उपदेशकों/प्रचारकों के रूप में सेवा कर रहींहै यह किसी भी तरह से स्त्रियों को कम महत्व का नहीं बताता परन्तुउन्हें सेवकाई का अधिक मौकादेता है उस सहमति में कि परमेश्वरने उन्हें कैसेवरदान दिये हैं

विपत्तिकाल क्या है? हम कैसे जानते है कि विपत्तिकाल सात वर्षो का होगा?
श्यीशु मसीह का पुनरागमन क्या है?
कलिसिया का मेघारोहण (बादलो पर उठाया जाना) क्या है?
अन्त समयो के क्या चिन्ह है?
पवित्र आत्मा के विरूद्ध निन्दा क्या है?
हम पवित्र आत्मा को कब/कैसे प्राप्त करते हैं?
मैं कैसे जान सकता हूँ कि मेरा आत्मिक वरदान क्या है?
जीवन का अर्थ क्या है?
अंत के समयो की भविष्यवाणीयो के अनुसार क्या होने वाला है?
क्या बाइबल सच में परमेश्वर का वचन है?
प्रभु भोज/ मसीही संगति का क्या महत्त्व है?
चर्च (कलिसिया) में उपस्थिति होना क्यों महत्वपूर्ण है?
मैं संगठित धर्म में क्यो विश्वास करू?
सब्त किस दिन होता है, शनिवार या रविवार? क्या मसीही लोगों को सब्त का दिन मानना चाहिए?